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एक लेखक की कहानी.....

लेखक के आंखों के नीचे जो निशान होते है, वो निशानी हैं उसकी कड़ी मेहनत की पहचान बनते है , जो उसने अपनी कहानी लिखते हुए कमाए है, कई रातें जाग कर बिताते हुए, एक लेखक के लिए उसकी कहानी का पूरा करना मायने रखता है, न की उसके वो निशान जो बदले में मिले, लेखक दिखने में आम हो सकता है, पर उसकी लिखी कहानियां उसका परिचय बनती है। कुछ कहानियां अच्छी हो सकती है, और कुछ नही, एहमियत होती है प्रयासों की जो लेखक करता हर बार और हर समय अपनी ज़िंदगी में ताकि वो पढ़ने वाले के दिलो और दिमाग पर अपना असर छोड़ सके अपने शब्दों के जाल से....

What is important to a writer?

What is important to a writer? The world full of his fantasies, suitable words to cover his imagination, and the reader who understands his written words and the feelings or emotions hidden in them, who can analyze them properly, the author does not need anything, neither praise nor wealth, just every word written by him. One who understands the meaning and can feel the thrill in them. The author puts his whole soul into his article to bring life to his words. The author doesn't need anything.....

एक लेखक के लिए क्या महत्वपूर्ण है?

एक लेखक के लिए क्या महत्वपूर्ण है? उसकी कल्पनाओं से भरी दुनियां, उसकी कल्पनाओं को समेटने के लिए उपयुक्त शब्द, और उसके लिखे शब्दों और उनमें छिपी भावनाओ या जज़्बात को समझने वाला पाठक जो उसका सही विष्लेषण कर सके लेखक को कुछ नही चाहिए न प्रशंसा न दौलात बस उसके लिखे हर शब्द का अर्थ समझने वाला और उनमें रोमांच को मेहसूस कर सके। लेखक अपने लेख में अपनी पूरी आत्मा डाल देता अपने शब्दों में जान डालने के लिए। लेखक को चाहिए कुछ नही.....

इस पूरी कायनात पर मौजूद हर शक्स दोहरी ज़िंदगी....

इस पूरी कायनात पर मौजूद हर शक्स, दोहरी ज़िंदगी जीता है। अगर मुमकिन हो तो, किसी के दिल में झांक के देखियेगा, राज़ खुलेंगे कुछ ऐसे, आंखों से आंसू खुद ब खुद, छलक आयेंगे दर्द उसका मेहसूस, करते-करते....

नशा ज़िंदगी का....

नशा ज़िंदगी का मुझपर इस कदर चढ़ा यारो  के मैं मुस्कुराना भूल गया, ज़िंदगी के सफर पर ऐसा निकला, अपना ठिकाना भूल गया, मौके बहोत आए खुद को बदलने के, खुद को समझाना भूल गया, आवाज देकर पुकारा मुझको सबने, मैं कौन हूं मैं अपनी पहचान भूल गया, नशा ज़िंदगी का मुझपर इस कदर चढ़ा यारो......

ज़रा सी बात थी वो

ज़रा सी बात थी वो उन्होंने मुझे निकल दिया, ज़िंदगी से अपनी,बातों में आकर गैरो की, विशवास न किया बातो का मेरी,मेरे कई जत्तनो के बाद भी, खामोश रहे वो मेरी मौजूदगी में भी, न जिक्र उन्होंने एक बार किया, छोड़ दिया उन्होंने मेरा साथ, ज़रा सी बात थी वो.....

नज़रे चुराता फिर रहा है....

नज़रे चुराता फिर रहा है शायद उसने गुस्ताखी की होगी कोई, रुसवा किया होगा किसी जोहराजबी को, किसी का खुशहाल आशियाना बर्बाद किया होगा, छुप रहा होगा गुनहगारों से या वो अपने चाहने वालो से नज़रे चुराता फिर रहा होगा, छुप रहा होगा खुदा से या खुद को तलाशने के लिए ....