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इस भीड़ भरी दुनियां में....

इस भीड़ भरी दुनियां में जब अपने चारो ओर चाहने वालो देखता हूं, तो मन एक ही खयाल आता है, अगर इतनी मोहोब्बत है इस दुनियां में, तो फिर मैं अकेला क्यूं हूं...

दिल के दरिया में....

दिल के दरिया में हलचल सी होने लगी है,  शायद प्यार की कश्ती उतार रहा है इसमें कोई....

दिल! दरवाजा करले बंद.....

दिल! दरवाजा करले बंद फिर से कोई तूफान प्यार का दस्तक देने को है। फिर कोई अंजान शख्स अपना होने को है। संभाल जा वक्त है  कही सहना न पड़े दिल टूटने का दर्द दोबारा, इस फरेबी दुनिया में सभी प्यार के बहाने तेरी मासूमियत को खरोचने को हैं। मतलब पूरा हो जाए जिसका वो तेरा साथ छोड़ने को है। सहारा देंगे तुझे अपना ये कहने वाले तेरी आबरू पर गीद की तरह नज़रे गड़ाए बैठे हैं। दिल करले दरवाजा बंद फिर से कोई तूफान प्यार का दस्तक देने को है।

Roothne Manane Ka Kaarva Chalta Rahega

Roothne Manane Ka Kaarva Chalta Rahega Zindagi Bhar, Chah Kar Bhi Mujhse Dur Nahi Reh Paoge Pal Bhar K Liye Bhi, Kyuki Khud Uparwale Ne Sath Likha Hai Hamara Janmo-Janam Tak Ka....

Is Puri Kaynat Me Tumse Yun Milna

Is Puri Kaynat Me Tumse Yun Milna Kisi Ittefaq Se Kam Nahi, Lagta Hai Khuda Bhi Chahta Hai, Hamari Mohabbat Adhuri Na Rahe....

कभी हम भी बहुत,

कभी हम भी बहुत काम के हुआ करते थे, जबसे इश्क़ हुआ है तुमसे तबसे इश्क़ करना, तुम्हें मेरे लिए इबादत सी हो गई है....

अपनी सोच को,

अपनी सोच को लफ्जों में कैद करना चाहते हैं, पर लफ्जों का क्या है कभी साथ देते हैं कभी नही, एक हम हैं जो फुर्सत में बार बार तुम्हे याद करके, लिखने बैठ जाया करते है....

आहिस्ता आहिस्ता मिली मेरी नज़र उनसे,

आहिस्ता आहिस्ता मिली मेरी नज़र उनसे, वो दिल में उतर गए कब उनके कैदी बन गए, उनकी मदहोश नज़रों ने होश में आने ही ना दिया...

खुदा सलामत रखे,

खुदा सलामत रखे उसे जिसने चलना सिखाया मुझे ठोकरें लगने के बाद, अपना प्यार लुटाया हमेशा हजारों मेरी गलतियों के बाद, पूरी रात ना सोई मुझको चोट लगने के बाद, खुद को रखा भूखा मुझको पेट भर खिलाने के बाद, खुशियां लूटा दी मुझपर अपने हिस्से की सारी मेरे दुख अपने आंचल में समेटने के बाद, तपती रही सूरज की गर्मी में मेरे सपनों को संजोने के बाद, खुदा सलामत रखे उसे जिसकी वजह से वजूद है मेरा इस दुनियां में आने के बाद...

ज़िंदगी गुज़र रही है,

ज़िंदगी गुज़र रही है साथ अपनो के एक  छोटे से आशियाने में खुदा सलामत रखे  हर किसी को बस यही गुज़ारिश है,  अल्फाज़ नही मिलते हाल ए दिल बयां  करने को लौटेंगे वो खुशी के पल जिसको याद कर हम अपने इस दिल को समझाते है, बस उम्मीद कायम रखना यही गुज़ारिश है खूब बातें होंगी जब मिलना एक दूसरे से होगा गिला शिकवे भी होंगे और किसी ने खोया कोई  अपना खास भी होगा, इत्मीनान रखिएगा बस यही गुज़ारिश है सफ़र थोड़ा लम्बा कटने को है बस अपनी ख्वाइशों को बचा के रखना यही गुज़ारिश है.....

मोहोब्बत को समझना,

मोहोब्बत को समझना किसी शख़्स के बस की बात नहीं, अक्सर उम्र बीत जाया करती है किसी के इंतज़ार में.....

अदाओं में ना जाने,

अदाओं में ना जाने कैसी कशिश है उनकी, वहीं ठहर जाता हूं जहां से शुरूआत करता हूं...