Posts

कुछ लोग,

कुछ लोग उम्र भर हिसाब रखते रह गए रिश्तों का, मैंने दोस्तों को चुनकर ज़िंदगी ही ख़ूबसूरत कर ली।

फ़ासले सिमट से,

फ़ासले सिमट से गए मोहब्बत में उनकी, कल का अजनबी, आज आईना बन गया।

दर्द-ए-सितम

दर्द-ए-सितम कैसे बयाँ करें, ऐ हमसफ़र तुम्हें  ख़्वाबों में तराशता रहा तुम्हें लम्हे गुज़रते रहे।

क़रीब बैठा रहा

क़रीब बैठा रहा है वो शख़्स एक तस्वीर की तरह वक़्त के साथ अश्कों का क़ाफ़िला गुज़रता रहा।

तकलीफ़ देता है

तकलीफ़ देता है मुझको आजकल मुस्कुराना उनका हर मुस्कुराहट के पीछे छुपा कोई फ़साना देखता हूँ।

मुलाकातों का ये

मुलाकातों का ये सफ़र अब आम होने लगा मैं तुम्हारी हसीन यादों का ग़ुलाम होने लगा

इश्क़ की स्याही से

इश्क़ की स्याही से दास्ताँ-ए-मोहब्बत लिख दी हमने, फिर भी हज़ारों सवाल दस्तक देते हैं उनके ज़ेहन में।