बंद पड़े हैं रस्ते, किस्मत के मेरी, खोल सकूं इन्हे, इतना हुनर नही, मुझमें मैं वो हुनर, कहां से लाऊं, थाम गया है, मेरा जीवन सारा, सोच में डूबा हूं, खोल सके जो, इसको वो दुआ, कहां से लाऊं....
हमारी ज़िंदगी है रात जैसी, अधूरे सपनों की सौगात लिए, खुले जज़्बात और अधूरी बात जैसी, अधूरेपन को हमसे रूबरू कराती हुई, हमारे अधूरे इश्क़ के ख़्वाब जैसी, मायूसी को अपने साथ लिए, हमारी ओर भागती हुई.....