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सब्र किया मैंने

सब्र किया मैंने खामोशी से गमों का प्याला खाली किया मैंने जुबां पर अपनी आने ना दिया नाम उस  शख्स का जो गुरुर था मेरा रुसवा किया हर बार मुझे बिखर सा गया हूं मैं टूटकर फिरभी हंसते हुए हाथो से उनके ज़हर पिया मैंने...

और एक दिन गुज़र गया

और एक दिन गुज़र गया इंतज़ार करते करते रोशनी का ज़िंदगी हर लम्हा गुज़र रही है आहिस्ता आहिस्ता मेरी उम्र घट रही जाने कब आयेगी खुशी ज़िंदगी में मेरी रोशनी बनकर थक गया हूं ज़िंदगी  को बहलाते फुसलाते अब तो आंखों से बरसाने पानी लगा है दिल को इत्मीनान दिलाते दिलाते और एक दिन गुज़र गया मेरा पर रौशनी मेरी आंखों की अब तक ना मिली मुझे......

यही अपनी कमाई है,

यही अपनी कमाई है जो खुद को तकलीफ देकर मैंने कमाई है,  जनाब तो गुरूर किस बात का करें मेहनत की रोटी का तो स्वाद ही अलग होता है। सुकून है ज़िंदगी में मेरी शायद यही अपनी कमाई है।

तेरे बिना ये रात,

तेरे बिना ये रात  मुझे अधूरी सी लगती है। मौजूदगी तुम्हारी मुझे जिंदगी, में अपनी अच्छी लगती है।  बेचैन करती है ये रात मुझको हर लम्हा जब याद तुम्हारी मुझे  सताने लगती है। जब होते तुम  साथ मेरे तो मुझे मेरे चेहरे पर  अपनी मुस्कान अच्छी लगती है। बिना तेरे मुझे अपनी सांसें भी पराई सी लगती है।

पल दो पल का याराना,

पल दो पल का याराना उनका और मेरा ज़िंदगी का किस्सा ही बनकर रह गया, दिखाई देता है अक्स उनका मुझे आज भी  आईने मे अपने जहन में खयाल उनका ही रहता है, मोहोब्बत होती अगर उनको भी मुझसे तो इश्क़ हमारा बुलंदी छू लेता....

आना जाना लगा रहेगा,

आना जाना लगा रहेगा तेरा ऐ मुसाफ़िर जबतक मिलती नही मंज़िल तुझे सफ़र करता रहता है तू हमेशा कभी तू क्यों ज़िंदगी में ज़रा सा भी थकता नही पुकारती है तेरी राह तुझको क्यों तू उनकी सुनता नहीं आना जाना लगा रहेगा तेरा ऐ मुसाफ़िर ज़िंदगी में कभी तू रुकना नही.....

सुकून मेरा खो सा गया है,

सुकून मेरा खो सा गया है पर न जाने क्यों तेरे कंधे पर, जब सिर रखता हूं तो, मैं सब कुछ भूल जाता हूं....

तेरे हाथों की मेंहदी का रंग,

तेरे हाथों की मेंहदी का रंग मेरी जिंदगी पर भी चढ़ने लगा है, मोहोब्बत में तेरी मैं बेवजह मुस्कुराने जो लगा हूं...

रचा ली मेंहदी मैंने,

रचा ली मेंहदी मैंने तेरे नाम  की अपने हाथों पर देखते है, मोहोब्बत तुम्हारी मेरे हाथों पर कितनी खिलती है.....

मेंहदी लगा के हाथों पर,

मेंहदी लगा के हाथों पर, जो तुम इतना इतरा रही हो, मेरी ही मोहब्बत का रंग है जो, तुम्हारे हाथों पर दिखने लगा है।