लेकर,

लेकर चिराग़ ए मोहोब्बत वो मेरी ज़िंदगी में अपना वजूद तलाशते रहते है, अब उन्हें कैसे बताऊं ये अंधेरा मुझे मेरी
ज़िंदगी में अच्छा लगने लगा है...

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