जब तुम्हारी ज़रूरत थी,

जब तुम्हारी ज़रूरत थी
मुझे भरी महफ़िल में तब
ना जाने तुम्हारे साय ने भी
साथ मेरा छोड़ दिया 
ढूंढती रही निगाहें मेरी
सिर्फ तुम्हे हर जगह
मिला न अक्स तुम्हारा
नज़रे झुकाकर रोने लगे
ख़ामोश पलकों से मेरा
दर्द बयां होता रहा.....

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