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धुन,

धुन ज़िन्दगी की अक्सर गुनगुनाता हूं मैं  बेचैन दिल को अपने राहत दिलाता हूं मैं,  भूल जाता हूं तमाम दुख दर्द अपना जब  कभी अधूरी हसरतो की महफ़िल सजाता हूं मैं,  खड़ा रहता हूं साथ अपनी ज़िंदगी के सदा जीवन के हर एक पहलू को बखूबी समझाता हूँ मैं, फ़िरभी हर दफ़ा लड़ते झगड़ते हुए  खुदसे ही हर मर्तबा हार जाता हूं मैं...

Fact,

हमारा आज कितना भी अच्छा क्यूं ना हो  आने वाले कल हमेशा शिकायत करता है

सुविचार,

हमारा आज कितना भी अच्छा क्यूं ना हो परंतु हमारा आने वाला कल सदैव उसकी निंदा ही करता है...

तुम्हारी चाहतों,

तेरी चाहतों की बारिश में मैं जब भीग जाता हूं अंगिनत ख्वाइशे उमड़ने लगती है दिल में मेरे...

दर्द के प्यालों,

"दर्द के प्यालों से दो बूंद इश्क़ क्या चुरा लिया हमनें बेइंतेहा मोहोब्बत छलकने लगी बेचैन आँखों से हमारी..."

साहिल,

उनकी चाहतों के साहिल में एक दिन डूब जाना है मेरी कश्ती को अब किसी किनारे की तलाश नहीं...

ए खुदा,

ए खुदा मेरी रगो में इंसानियत को यूंही बरक़रार रखना, बस एक कतरा ही काफ़ी है किसी को ज़िंदगी देने लिए...