खामोशी वो जवाब है जो हार को भी जीत में बदल दे, खामोशी एक ऐसी निशब्द गूंज है जो दूर तक सुनाई देती है। खामोशी वो है जो बड़ी से बड़ी, लड़ाइयां पल भर में शांत कर दे, खामोशी तो बस एक जरिया है, मन की भावनाओ को व्यक्त करने का, खामोशी तो एक जवाब है, जो बधिर को भी सुनाई देता है।
जिस गली से हुआ गुज़र तेरा कदमों के तेरे निशा वहां आज भी है ढूंढता हूं तुझको हर गली और हर जगह जहां तेरी खुशबू आज भी है मिलता नही मुझको पता तेरा शायद तुमको मुझसे नफ़रत आज भी है भूलता नही तुझे भुलाने पर क्योंकि तेरी सांसों की महक मेरी सांसों में आज भी है दिखते नही निशा तेरे होंठों के किसी को जो मेरे होंठों पर आज भी है बेपनाह मोहोब्बत करते हो मुझसे जो मेहसूस होती मुझको आज भी है भटकती है रूह तेरी अक्सर जिसको इंतज़ार मेरे लौट आने का आज भी है.....
काँटे की तरह चुभ जाता है, इश्क़ बंद आंखों से नज़र आता है, इश्क़ दर्द मीठा-मीठा दे जाता है, इश्क़ अक्सर बेवजह यूंही तड़पाता है, इश्क़ रोज़ ख्वाबों में मिलना आता है, इश्क़ ज़रूरत पड़ने पर काम आता है, इश्क़ कभी हसंता तो कभी रुलाता है, इश्क़ बात बात पर रूठ जाता है, इश्क़ रूठे हुए को प्यार से मनाता है, इश्क़, सोए हुए को नींद से जगाता है, इश्क़ एक दूजे के क़दर करना सिखाता है, इश्क़ गलती करने पर मासूम बन जाता है, इश्क़ खुली आंखों से सपने देखना सिखाता है, इश्क़ किसी के इंतज़ार में जीना सिखाता है, इश्क़ खामोशी को पढ़ना सिखाता है, इश्क़ त्याग करना सिखाता है, इश्क़ दूर रहकर भी अपनी याद दिलाता है, इश्क़ प्यार में झुकना सिखाता है, इश्क़ मेहसूस तो होती है चुभन इश्क़ की, अक्सर पर ज़ख़्म नज़र नहीं आता है...
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