रात की कालिमा धुल गई

रात की कालिमा धुल गई
मेरे सपनो की दुनियां न जाने कहां दीवारों के पीछे जाकर छुप गई, बीती रात की कुछ सुनहरी यादें थी जो जहन में मेरे शरबत की तरह घुल गई, हुआ सवेरा दिल में मेरे जब सुबह की खिड़की खुल गई.....

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